जापान में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं
नई दिल्ली: जापान में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि सात महीने बाद फिर यहां आने का अवसर मिला। यह संयोग है कि पिछली बार जब यहां आया था तब यहां चुनाव परिणाम आए थे, और आपने मेरे मित्र शिन्जो आबे में भरोसा जताया था और आज जब मैं यहां आया हूं, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने प्रधानसेवक पर उससे भी ज़्यादा भरोसा जताया है।

बता दें कि पीएम मोदी ने कहा कि 130 करोड़ भारतीयों ने पहले से भी मजबूत सरकार बनाई है। ये अपने आप में बहुत बड़ी घटना है। तीन दशक बाद पहली बार लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। मुझे पता है कि आपमें से भी अनेक साथियों का इस जनमत में अमूल्य योगदान रहा है। जब दुनिया के साथ भारत के रिश्तों की बात आती है तो जापान का उसमें एक अहम स्थान है। ये रिश्ते आज के नहीं हैं, बल्कि सदियों के हैं। लोकतंत्र के प्रति भारत के सामान्य जन की निष्ठा अटूट है। हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रणाली दुनिया में अग्रणी है।
वहीं पीएम मोदी ने कहा कि आप इतनी दूर बैठकर जैसे हिंदुस्तान को देखते हैं, तो सत्य को जानने की ताकत आपके पास ज्यादा होती है। भारत की यही शक्ति 21वीं सदी के विश्व को नई उम्मीद देने वाली है। 1971 के बाद देश ने पहली बार एक सरकार को प्रो इंकम्बेंसी जनादेश दिया है।
साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे बोलचाल के भी कुछ सूत्र हैं जो हमें जोड़ते हैं- जिसे भारत में ‘ध्यान’ कहा जाता है, उसे जापान में ‘जेन’ कहा जाता है और जिसे भारत में ‘सेवा’ कहा जाता है, उसे जापान में भी ‘सेवा’ कहा जाता है। उन्होंने कहा कि गांधी जी की एक सीख बचपन से हम लोग सुनते आए हैं और वो सीख थी ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो।
भारत का बच्चा-बच्चा इसे भली भांति जानता है, लेकिन बहुत कम लोगों को ये पता है कि जिन तीन बंदरों को इस संदेश के लिए बापू ने चुना उनका जन्मदाता 70वीं सदी का जापान है। उन्होंने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के जिस मंत्र पर हम चल रहे हैं, वो भारत पर दुनिया के विश्वास को भी मजबूत करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया के साथ भारत के रिश्तों की बात आती है तो जापान का उसमें एक अहम स्थान है। ये रिश्ते आज के नहीं हैं, बल्कि सदियों के हैं।

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